यूपी पंचायत चुनाव में बढ़ेगा इंतजार, प्रधानों को मिल सकता है छह महीने का और कार्यकाल
19 August
उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में देरी तय मानी जा रही है। समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग पंचायत आरक्षण पर अपनी रिपोर्ट नवंबर-दिसंबर तक सरकार को सौंप सकता है। इसके बाद विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने के कारण पंचायत चुनाव अगले साल जून-जुलाई से पहले होना मुश्किल माना जा रहा है। पंचायत चुनाव अप्रैल 2026 में होने थे, लेकिन समय पर नहीं हो सके। 26 मई को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्हें छह महीने के लिए प्रशासक नियुक्त किया गया था, जिसकी अवधि नवंबर में पूरी हो रही है। आयोग को पंचायत आरक्षण पर रिपोर्ट तैयार करने के लिए प्रदेश के सभी 75 जिलों का दौरा करना है। 17 अगस्त तक आयोग केवल 22 जिलों का भ्रमण कर पाया था। ऐसे में बाकी जिलों के सर्वे और रिपोर्ट तैयार करने में नवंबर-दिसंबर तक का समय लगने की संभावना है। उधर, विधानसभा चुनाव तय समय पर होने हैं।
दिसंबर के बाद चुनावी प्रक्रिया शुरू होकर अप्रैल-मई तक चल सकती है। ऐसे में पंचायत चुनाव जून-जुलाई से पहले कराना संभव नहीं दिख रहा है। चुनाव में देरी होने पर प्रधानों को प्रशासक के रूप में छह महीने का एक और कार्यकाल मिलने के आसार हैं। वहीं, ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है। मामले में 19 अगस्त को सुनवाई होनी है, जिसमें पिछड़ा वर्ग आयोग अपनी स्टेटस रिपोर्ट और सरकार अपना पक्ष रख सकती है।
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